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कितनी मजबूर

कितनी मजबूर मिली हयात हमे जीने की चाह में ना मर सके

लिखा था चराग ए शाम की तरहां जलना अंधेरा ना कर सकें

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Written by Taureano Ent

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भरोसा ना करना