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सदाएॅ देते हुए

सदाएॅ देते हुए

सदाएॅ देते हुए अौर ख़ाक उङाते हुए
मैं अपने आप से गुज़रा हूॅ तुझ तक अाते हुए
-Rahman Farish

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Written by bvbt3

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क्या बाक़ी है

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मायुस-ए-मोहब्बत

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