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होश ही न आये

होश ही न आये, हर पहर पीना पड़ता है

जीने के लिए जिंदगी, जहर पीना पड़ता है

खड़े खड़े,कहां चार पैसे कमा पाता हूं मै

लेकर रिक्शा शबो रोज शहर पीना पड़ता है

जिस्म उठाये कैसे जहन की उलझनों को

नही है तमन्ना पीने की, खैर पीना पड़ता है

– Ramawtar Varun

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Written by Taureano Ent

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भरोसा ना करना