अहंकार शायरी - घमंड शायरी - Ahankar Shayari - Ghamand Shayari - Ghamandi Shayari - Guroor Shayari - गुरूर शायरी

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  • Posted on 12/08/2018

    बरात और जनाजे में

    बरात और जनाजे में कोई ख़ास फर्क नहीं होता ....
    एक में "मैं" तो दूसरे में मेरा अहंकार जल जाता है



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  • Posted on 12/08/2018

    समर्पण

    *** अहंकार शायरी ***

    सीमा तो अहंकार की होती है
    समर्पण की कोई सीमा नहीं होती ।



  • Posted on 12/08/2018

    मेरा अहंकार

    मेरा अहंकार ही पर्दा है मेरे और उसके दरम्यान
    और मुझे ही शिकायत है कि वो दिखाई क्यों नही देता



  • Posted on 12/08/2018

    मेरा मिज़ाज

    *** अहंकार शायरी ***

    मेरा मिज़ाज गुरुर नहीं पहचान है मेरी...
    जो ना समझ सको तो किनारा बेहतर है...!!



  • Posted on 12/08/2018

    अहंकार में

    अहंकार में इंसान को कभी इंसान नहीं दिखता,
    जैसे छत पर चढ़ जाओ तो अपना ही मकान नहीं दिखता..