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अौकात नहीं थी

अौकात नहीं थी

अौकात नहीं थी ज़माने में जो हमारी कीमत लगा सके..
कंबख़्त इश्क में क्या गिये, मुफ़्त में नीलाम हो गये..

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Written by bvbt3

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जब-जब मुझे लगा

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ये मत समझ

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