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कहीं फिसल न जाऊं

कहीं फिसल न जाऊं

 

कहीं फिसल न जाऊं तेरे ख्यालों में चलते चलते…
अपनी यादों को रोको मेरे शहर में बारिश हो रही है…

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Written by Taureano Ent

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हम समझदार भी इतने हैं

हम समझदार भी इतने हैं

अकल बादाम खाने से

अकल बादाम खाने से नही, धोका खाने से बड़ती है