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छुपे छुपे से रेहते हैं

छुपे-छुपे से रेहते हैं

छुपे-छुपे से रेहते हैं सरेआम नही होते
कुछ रिशते सिर्फ अहसास हैं, उनके नाम नही होते

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Written by bvbt3

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पता नहीं क्यूॅ

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Mujhse mere gunaahon ka hisaab na maang

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