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बदला बदला सा

बदला बदला सा है क्यों आज रवैया तेरा

किसके पहलूँ में है बदला ये नज़रिया तेरा

तूने मुड़कर ही न देखा कभी दीवाने को

हाय पीछा किया है मैंने ज़बरिया तेरा

उसको शक हो गया ये प्यार मुझे है तुझसे

जान ले ले न मिरी आज वो भैया तेरा

नज़्म लिखता हूँ अदाओं पे तेरी रोज़ाना

देख दुनिया से है ग़ाफ़िल ये लिखय्या तेरा

– आज़म ख़ान

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Written by Taureano Ent

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भरोसा ना करना