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याद आएं हैं

याद आएं हैं

 

याद आएं हैं उफ़ गुनाह क्या क्या!
हाथ उठाएं हैं जब दुआ के लिए!
– Zaaki Karorvi

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Written by Taureano Ent

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हम समझदार भी इतने हैं

हम समझदार भी इतने हैं

अकल बादाम खाने से

अकल बादाम खाने से नही, धोका खाने से बड़ती है