आसमान शायरी - Aasman Shayari - Aasman Chune Ki Shayari

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  • Posted on 11/12/2017
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    बिन सफ़र, बिन मंज़िलों का एक रास्ता होना चाहता हूॅ

    कहीं दूर किसी जंगल में, ठहरा दरिया होना चाहता हूॅ

    एक ज़िंदगी होना चाहता हूॅ बिना रिश्तों अौर रिवाज़ों की

    दूर आसमान से गिरते, झसने में कहीं खोना चाहता हूॅ

    मैं आज मैं होना चाहता हूॅ

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  • Posted on 21/12/2017

    उसके चेहरे की चमक

    *** आसमान शायरी ***

    उसके चेहरे की चमक के सामने सब सादा लगा
    आसमान पे चाँद पूरा था मगर आधा लगा



  • Posted on 19/01/2018

    यूँ जमीन पर बैठकर

    यूँ जमीन पर बैठकर क्यूँ
    आसमान देखता है...?

    पाँखों को खोल जमाना
    सिर्फ उड़ान देखता है...?

    लहरों की तो फितरत है
    शोर मचाने की....?

    मंजिल उसी की होती है जो
    नज़रों में तूफान देखता है...?

    सुप्रभात



  • Posted on 15/04/2018

    घबरा के

    *** आसमान शायरी ***

    घबरा के आसमान की तरफ देखते हैं लोग,
    जैसे खुदा ज़मीन पर मौजूद ही न हो ।



  • Posted on 06/06/2018

    किसान और बारिश

    अब भी आसमान पर छाई है ये काली घटाएँ
    चाँद और सूरज भी जा छुपा है इन बादलों के साये।।

    किसान भी थक गए कर भगवान से गुजारिश,
    कब तक थाम जाये ये बीन मौसम का बारिश ।।

    ए-ख़ुदा नुकसान मेरा, दुःखी मैं, फिर भी रोये तू जा रहा है,
    किसान के आंसुओ को इन बारिशो के जरिये चुपाये क्यों जा रहा है।।

    मैं अब तक नहीं समझा,
    कैसी ये बरखा, कैसी ये रैन है,
    ये प्रकृति या फिर इंसानी देन है??

    ~आशुतोष ज. दुबे