किसान पर शायरी - किसान शायरी - किसान पर कविता

19
  • Posted on 27/04/2018

    कीमत तो खूब बड़ गई

    कीमत तो खूब बड़ गई शहरों मे धान की
    बेटी विदा न हो सकी फिर भी किसान की
    - Vikash



  • Username Admin

    See Also :- Papa Teacher Jokes Part 2 - Sawal Jawab

  • Posted on 05/06/2018

    लोग कहते हैं

    *** किसान पर शायरी ***

    लोग कहते हैं बेटी को मार डालोगे,तो बहू कहाँ से पाओगे?
    जरा सोचो किसान को मार डालोगे, तो रोटी कहाँ से लाओगे?
    Daring Khan Khan



  • Posted on 05/06/2018

    किसान से किश्तों तक

    भू,धरतल को खींच-सींच
    ज्यों अन्न अनाज उपजाए

    तपती धूप न देखी थी
    जब सूर्य आग बरसाए

    हक़ मेरी थारी का क्यों
    हर वर्ष ही मारा जाए

    तन के पानी से सींचा था
    हर दिन यु घुट-घुट जीता था

    जाने क्या होगा जीवन में
    ये सोच-सोच मर जाए

    फटे वस्त्र,सूखा शरीर
    मिट्टी में लिपटा जाए

    जिस बूँद की आस लिए मन में
    आके वह प्रलय मचाए

    हार के इक दिन जीवन से
    वह फन्दा गले लगाए
    वह फन्दा गले लगाए।
    - नीलम सिंह



  • Posted on 05/06/2018

    मेरे देश के किसान

    *** किसान पर शायरी ***

    मेरे देश के किसान को,
    पुंजी वादी, बिचौलीयो ने,
    कई तरह से लुटा तो,
    उसका दुपट्टा रह गया फटा ၊
    लिखी गई कहानी,किताबे,
    फटे दुपट्टे पर, फिल्म वालों ने,
    पैसा कमाया झोली भर भर कर ၊
    राजनेता ने बनाया महल,
    उसके आंदोलन पर ၊
    उसका मिट्टी का मकान,
    नही बन पाया सीमेंट का घर ၊

    किसान की बेटी, जो बारीश में,
    भीगी हुई फटी चुनरी संभालते,
    बोती है धरती में बीज ၊
    अंकुरीत होने के लिए ၊
    सबको जीवन देने के लिए ၊
    उसी चुनरी से खत्म करती जीवन
    ၊ किसान पैसा जुटा न पाता शादी के लिए ၊

    किसान का बेटा,
    बुआयी के बाद, फटा पायजमा,
    संभालते हुए, करता इंतज़ार ၊
    नई फसल का, नये पायजामे का ၊
    शिक्षक बनने के लिए फिस का,
    लेकिन,
    पुंजी वादी, बिचौलीयो ने,
    इस तरह से लुटा तो,
    उसका पायजामा रह गया फटा ၊

    किसान की घरवाली,
    चुपचाप देखती है,
    कभी फटी घर की छत की ओर,
    कभी, अपनी फटी साडी की ओर ၊
    कभी फटी बेटी की चुनरी ၊
    कभी फटा पायजामा,कभी दुपट्टा ၊
    नई उम्मीद , नया धागा,
    लेकर करती है कोशिश ၊
    फटे को सिलाने की ၊
    करती इंतजार,
    अगली बारीश का,अगली फसल का ...

    - प्रदीप सहारे



  • Posted on 05/06/2018

    मुल्क मे जो

    मुल्क मे जो सब से ज्यादा परेशान है
    उसी मेरे भाई का नाम किसान है
    -नदीम अहमद फ़ाइज़