Alfaaz Shayari - अल्फाज शायरी

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  • Posted on 14/11/2017
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    अब ये न पूछना कि... ये अल्फाज़ कहॉ से लाता हूॅ
    कुछ चुराता हूॅ दर्द दूसरों के, कुछ अपना हाल सुनाता हूॅ

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  • Posted on 02/12/2017
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    *** alfaaz shayari ***

    खामोशी तुम समझ नहीं रहे,
    अल्फाज़ अब बचे नहीं..

  • Posted on 29/01/2018

    ज़िन आँखों को

    ज़िन आँखों को तू तकता था वो आँखें पत्थर हैं अब
    
ज़िन आँखों मैं ख्वाब कई थे उन्मे तू बस्ता था तब

    धुन्धली सी यादे हैं कुछ सहमे से कुछ राज़ भी हैं 

    खोई सी नाजुक घढ़ियाँ, गज़लों के कुछ अल्फाज भी हैं

    कहाँ हुई ओझल वो शामे कहाँ गया वो प्यार तेरा 

    जब आँखो मैं सागर उतरा डूब गया संसार मेरा

    एक तबाही फिर से करदे यादों मैं सुर्खी आ जाए 
    
एक नया सागर फिर ऊमढ़े फिर गम को तेरे पा जाए

    बार बार जो मर के देखे कोई ऐसा भी दिलदार सही
    
शक की गुंजाइश कुछ ना रहे की हमको तुझसे प्यार नहीं !
    - Yamini



  • Posted on 22/02/2018

    बेवफाई को भी तेरी

    *** alfaaz shayari ***

    बेवफाई को भी तेरी, इक राज रखा हैं मैंने
    बेपनाह मोहब्बत का ये अंदाज रखा हैं मैंने
    गनीमत हैं ये कलम भी तुझसे बदतमीजी करें
    मेरी शायरी में भीे तेरा, लिहाज रखा हैं मैनें।
    छलकती हैं आज भी कभी तनहाई मेेें आँखे
    तो लगता हैं की तुझे ही, नाराज रखा हैं मैंने।
    तुझे खोकर जैसे, खौफ-ए-खुदा भी न रहा
    तेरे बाद तो यही अपना मिजाज रखा हैं मैंने।
    मोहब्बत' के मायने भी तुझसे ले के तुझी पे थे
    अब तो मेरे पास सिर्फ ये अल्फाज रखा हैं मैंने।



  • Posted on 10/10/2018

    इजहार ए इश्क की

    इजहार- ए- इश्क की खातिर कई अल्फाज़ सोचे थे ,
    खुद को ही भूल बैठे हम जब तुम सामने आये !!