Samandar Shayari - समंदर शायरी - दरिया शायरी

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  • Posted on 11/12/2017
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    बिन सफ़र, बिन मंज़िलों का एक रास्ता होना चाहता हूॅ

    कहीं दूर किसी जंगल में, ठहरा दरिया होना चाहता हूॅ

    एक ज़िंदगी होना चाहता हूॅ बिना रिश्तों अौर रिवाज़ों की

    दूर आसमान से गिरते, झसने में कहीं खोना चाहता हूॅ

    मैं आज मैं होना चाहता हूॅ

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  • Posted on 11/12/2017
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    *** samandar shayari ***

    कोई कश्ती में तन्हा जा रहा है
    किसी के साथ दरिया जा रहा है
    - Mohsin Zaidi

  • Posted on 17/12/2017

    दरिया बनकर

    दरिया बनकर किसी को डुबाने से बेहतर है,
    की जरिया बनकर किसीको बचाया जाए



  • Posted on 21/05/2018

    समंदर जैसा

    *** samandar shayari ***

    दिल समंदर जैसा रखना साहेब
    नदिया खुद मिलने आयेगी
    - Sonia



  • Posted on 21/05/2018

    कह देना समंदर से

    कह देना समंदर से हम ओस के मोती हैं
    दरिया की तरह तुझ में मिलने नहीं आयेंगे ...
    - Siya