Saza Shayari - सज़ा शायरी

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  • Posted on 27/10/2017
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    चलो बाॅट लेते हैं अपनी सज़ाऐं
    ना तुम याद अाअो, ना हम याद आएें

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  • Posted on 11/12/2017
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    *** saza shayari ***

    हम अपने दुश्मन को भी बहुत मासूम सज़ा देते हैं,
    नही उठाते उस पर हाथ बस नज़रों से गिरा देते हैं

  • Posted on 11/12/2017
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    जुर्म में हम कमी करें भी तो क्यूॅ?
    तुम सज़ा भी तो कम नहीं करते!
    - Jaun Eliya

  • Posted on 06/01/2018

    बिछड़ के तुम से

    *** saza shayari ***

    बिछड़ के तुम से ज़िंदगी सज़ा लगती है,
    यह साँस भी जैसे मुझ से ख़फ़ा लगती है।
    तड़प उठती हूँ दर्द के मारे,
    ज़ख्मों को जब तेरे शहर की हवा लगती है ।
    अगर उम्मीद ए वफ़ा करूँ तो किस से करूँ,
    मुझ को तो मेरी ज़िंदगी भी बेवफ़ा लगती है।
    - Aditi Agarwal



  • Posted on 31/01/2018

    मांग भरने की सज़ा

    मांग भरने की सज़ा
    कुछ इस कदर पा राहा हूं
    उसकी मांग पूरी करते करते
    मांग मांग कर खा राहा हू