Zakhm Shayari - Zakham Shayari In 2 Line

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  • Posted on 22/08/2017
    Username Admin

    Ek alag hi pehchaan banane ki aadat hai humein... Zakhm ho jitna gehra utna muskurane ki aadat hai humein...

  • Username Admin

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  • Posted on 01/02/2018

    वक़्त से ज़रा

    *** zakhm shayari ***

    वक़्त से ज़रा बचा लूँ मैं इन्हें
    कि उनकी ही तो ये अमानत हैं,
    वरना तो हर "ज़ख़्म" भर देना
    वक़्त की बड़ी पुरानी सी आदत है

    देखो एक गुलशन की नज़र से तो
    ख़ार भी फूलों से ही हैं खुबसूरत,
    क्या करें वो गर चुनना बस फूल
    ज़माने की बड़ी पुरानी सी रिवायत हैं

    -‍ अजय उस्तुवार



  • Posted on 03/03/2018

    इक कोशिश ये

    इक कोशिश ये कि कोई देख न ले दिल के जख्म
    इक ख़्वाहिश ये कि काश, कोई देखने वाला होता



  • Posted on 22/04/2018

    मेरी मेहनत

    *** zakhm shayari ***

    मेरी मेहनत तुम्हारी मेहरबानियो के सिले हैं
    कलम से लिखकर जख्म दिखाए हैं और लव सिले हैं
    जो दावा करते थे कभी ना बिछड़ेंगे तुमसे
    वो ख्वाबों में भी ख्यालों की तरह मिले हैं
    - Mustakeem Ali



  • Posted on 23/04/2018

    टूट जाये न भरम

    टूट जाये न भरम होंठ हिलाऊँ कैसे..
    हाल जैसा भी है लोगों को बताऊँ कैसे..

    खुश्क आँखों से भी अश्कों की महक आती है ..
    मैं तेरे ग़म को ज़माने से छुपाऊँ कैसे..

    तू ही बता मेरी यादों को भुलाने वाले..
    मैं तेरी याद को इस दिल से भुलाऊँ कैसे..

    फूल होता तो तेरे दर पे सजा रहता..
    ज़ख़्म ले कर तेरी दहलीज़ पे आऊं कैसे..

    तू रुलाता है तो रुला मुझे जी भर के..
    तेरी आँखें तो मेरी हैं, मैं इन को रुलाऊँ कैसे..