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Zamana Shayari In Hindi – ज़माना शायरी | Unclejokes

एक तुम को अगर चुरा लूँ मैं…?

सारा ज़माना गरीब हो जाये

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आशिकी में तेरी बीता, वो फ़साना याद है,

तेरी उल्फत का मुझे, गुज़रा ज़माना याद है।

कब मिले, कैसे मिले, कुछ नहीं है याद अब,

तीर जो दिल पर लगा था वो निशाना याद है।

मेरे लाख कहने पर भी फ़ोन ना रखना तेरा,

मेरी ज़िद के चलते तेरा,रूठ जाना याद है।

कौन लगता हूं मैं तेरा, पूछता है जब ये तू,

शर्म से मेरा लजाकर, मुस्कुराना याद है।

क्या ख़बर थी ये”हिना”को,ज़िंदगी बन जाएगा वो,

मुझको तो बस बेखुदी में, दिल लगाना याद है।

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तुम्हें सारा ज़माना चाहिए था ?…

तो फिर पहले बताना चाहिए था…

-Zubair Ali Tabish

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गुज़र गया वो ज़माना, कहें तो किस से कहें

बिन देखे तेरी मुस्कान, रहें तो कैसे रहें….

तेरी आँखों के समंदर में ही लगा लेता था गोते..

अब इस ठंडे पानी में स्नान करें तो कैसे करें

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दुश्मन को भी सीने से लगाना नहीं भूले,

हम अपने बुजुर्गों का जमाना नहीं भूले!

– सागर आज़मी

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Written by bvbt3

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